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Swati Yarso

Kundi, Pahadi Log a Poem by Swati Yarso

उस एक पल दहक सी गयी जब कुंडी ने अपना ही काम किया… a Poem by Swati Yarso

उस एक पलदहक सी गयीजब कुंडी नेअपना हीकाम किया | कितना भयावह हैकुछ घंटों के लिएअनचाहेबंदी बन जाना | बंद गुसलखाना मेंबंदीकोई और भी हैजिन्हें… Read More »उस एक पल दहक सी गयी जब कुंडी ने अपना ही काम किया… a Poem by Swati Yarso