Author : Pahadi Log

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Poetry

इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है… Beautiful poem by Kartik Bhatt

Pahadi Log
इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है.. नदियों को निकलते देखा है… पानी को फिसलते देखा है.. ज़रूरतों का आभाव...
Poetry

फिर जवानी नीचे भागती है, और बुढ़ापा ऊपर बैठा बस राह तकता है | poem by Kartik Bhatt

Pahadi Log
वो जो देखा था हमने एक सपना, कि कैसा होगा अलग प्रदेश अपना.. वो सपना रोज़ टूटता हैं, जब...
Culture

होली का आमन्त्रण – हिमांशु पाठक | Pahadi Log

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कोरोना काल में लगे लॉकडाऊन को एक साल पूरा हो चुका है। हमारे कई बंधु सपरिवार लॉकडाऊन की पीड़ा...