Apun Pahada - Pahad se
Poetry

इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है… Beautiful poem by Kartik Bhatt

इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है..
नदियों को निकलते देखा है…
पानी को फिसलते देखा है..
ज़रूरतों का आभाव भी देखा है…
पलायन का घाव भी देखा है…
घरों को खंडर होते देखा है…
खेतों को बंज़र होते देखा है…
अपनी मारती भाषाएँ देखी है…
अपनी टूटती आशाएँ देखी है..
अपनी नदियों का खनन भी देखा है..
अपने सपनो का हनन भी देखा है…
अपनो को भागते देखा है..
ख़्वाबों को जागते देखा है…

इस पहाड़ ने सब कुछ देखा है..
पर आँखे इसकी उम्मीद न खोती है..
थक चुकी है आँखे वो
पर एक पल के लिए न सोती है..
वो आँखें बस इस ही उम्मीद में जाग रही है..
की कभी तो वापस मुड़ेगी वो जवानी जो आज भाग रही है…

Related posts

“आपुण पहाड़ा” – हिमाँशु पाठक जी की रचना

Pahadi Log

अतीत के पथ पर – हिमाँशु पाठक जी की कलम से

Himanshu Pathak

फुरसत के क्षणों में, दोस्तों के साथ जब में | चाय की चुस्की

Pahadi Log