नारायण आश्रम (Narayan Ashram) जो कि उत्तराखंड में कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। जो बहुत ही सुंदर और आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में इसका निर्माण श्री नारायण स्वामी जी ने किया था। इन्हीं के नाम से आश्रम को जाना जाता है जो कि काली नदी और नेपाल सीमा के काफी नजदीक पड़ता है।
आश्रम का उद्देश्य (Narayan Swami Ashram)
स्वामी जी का आश्रम बनाने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा का प्रसार करना था। शुरुवात में यहां पर आसपास के ही बच्चों को सामाजिक रूप से रहने के तौर तरीके सिखाए जाते थे। यह क्षेत्र हिमालय पर्वत की श्रृंखलाओं से जुड़ा होने के कारण नवंबर से जनवरी के मध्य बर्फ से ढका रहता है। इस दौरान आश्रम बंद रहता है।
आश्रम का महत्व (Narayana Ashram)
आश्रम की बनावट और चारों ओर का परिसर पर्यटकों को काफी लुभाता है। शान्ति तथा एकांत को पसन्द करने वाले लोग ध्यान के लिए आते है। आश्रम के आसपास का वातावरण बहुत ही शांत है जहां पर आप ध्यान और योग कर सकते हैं। बर्फ पिघलने के बाद आश्रम के चारों ओर बहुत ही सुन्दर फूल उगते है जो मन को मोह लेते है।
पर्यटन की दृष्टि से
जहां तक पर्यटन की बात है साल भर में काफी मात्रा में लोग यहां आते है स्कूल कॉलेज के टूर हो या फिर फैमिली टूर सभी यह आकार काफी आनंद लेते है तथा फोटोग्राफी के लिए भी बहुत ही सुन्दर जगह है जहां पर अनेक प्रकार के सुन्दर फूल तथा मंदिर की बनावट ही खुद में सुन्दरता का प्रतीक है। प्राचीन में यह आश्रम कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए रुकने का स्थान भी था कालांतर में यात्रा का मार्ग बदल जाने से अब यहां तीर्थ यात्रीयो का आना कम हुआ है।
आश्रम तक पहुंचने के लिए आपको पिथौरागढ़ मार्केट से लगभग 115 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।
यात्रा का अनुभव (Experience your Journey)
यात्रा के लिए सितम्बर,अक्टूबर तथा फ़रवरी, मार्च उचित समय है। हिमालय श्रंखला से जुड़ा होने के कारण यहां का सामान्य तापमान 20 से 30 डिग्री रहता है तथा सर्दियों में यह सून्य तक भी पहुंच जाता है। यात्रा के दौरान आपको तिरछे सड़को और ऊंचे पहाड़ों के बीच का आनन्द प्राप्त होता है। ठंडी ठंडी सी चेहरे पर पड़ने वाली हवाएं आपको तरो ताज़ा कर देती है। प्रकृति की सुन्दरता जिसमे बर्फ से ढकी चोटियां तथा सुन्दर फूल आपको देखने को मिलते है।
