Skip to content

Uttarakhand Culture

Apun Pahada - Pahad se

इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है… Beautiful poem by Kartik Bhatt

इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है.. नदियों को निकलते देखा है… पानी को फिसलते देखा है.. ज़रूरतों का आभाव भी देखा है… पलायन का घाव… Read More »इस पहाड़ ने क्या-क्या देखा है… Beautiful poem by Kartik Bhatt

Pahadi Log, Migrate Image Issue

ये हाल देख के मेरा पहाड़ भी रो गया – poem by Kartik Bhatt

वो कभी घर हुआ करता था हमारा पर आज वो खंडहर है, वहाँ कभी खेत हुआ करते थे हमारे पर आज वो सब बंजर है|… Read More »ये हाल देख के मेरा पहाड़ भी रो गया – poem by Kartik Bhatt

Offer water to Sun - Pahad se

जाने सूर्य को जल अर्पण का सही तरीका | Offer Water to Sun

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सूर्य को जल चढ़ाने (Offer Water to Sun) से होने वाले लाभो के बारे मे बहुत सारी बाते है।… Read More »जाने सूर्य को जल अर्पण का सही तरीका | Offer Water to Sun

Chandra Singh Raahi, Uttarakhand Music

उतराखंड लोकगीत का पितामह। चंद्र सिंह राही

“फ्वा बाघा रे”,”चैत की चैत्वाल” इन दोनो लोकगीत की धुन उत्तराखंड के हर घर मैं गूंजती है। पर इनकी पहचान इनके रीमेक से ज्यादा मिली… Read More »उतराखंड लोकगीत का पितामह। चंद्र सिंह राही

Kundi, Pahadi Log a Poem by Swati Yarso

उस एक पल दहक सी गयी जब कुंडी ने अपना ही काम किया… a Poem by Swati Yarso

उस एक पलदहक सी गयीजब कुंडी नेअपना हीकाम किया | कितना भयावह हैकुछ घंटों के लिएअनचाहेबंदी बन जाना | बंद गुसलखाना मेंबंदीकोई और भी हैजिन्हें… Read More »उस एक पल दहक सी गयी जब कुंडी ने अपना ही काम किया… a Poem by Swati Yarso

Ragipizza Recipe by Pahadi Log

Ragipizza (मडुआ-कोदा-नाचनी) | पहाड़ी पिज्ज़ा… Recipe by Radha Bangari

वैसे तो सभी को पिज्ज़ा खाना पसंद है, खासकर बच्चो को और आजकल लाँकडाउन मे आप अपने बच्चों को हेल्दी एंव स्वादिष्ट व्यंजन (Ragipizza) खिला… Read More »Ragipizza (मडुआ-कोदा-नाचनी) | पहाड़ी पिज्ज़ा… Recipe by Radha Bangari

Radha Bangari Jee Pahad se Uttarakhand | Pahadi Log

बोलता हुआ घर… राधा बंगारी जी की कलम से

जिन घरों को कभी प्यार से बनाया था, जिन घरों ने हमें धूप वर्षा और कई चीजों से बचाया था, आज वही घर वीरान से… Read More »बोलता हुआ घर… राधा बंगारी जी की कलम से

Radha Bangari, Pahadi Log Poetry

अगर देखो कभी गौर से तो तुम्हे मेरा हर दर्द दिखाई देगा… राधा बंगारी जी की कलम से

देखो कभी जो गौर से मुझे, मेरा हर दर्द दिखाई देगा,कुछ न कह कर भी तुम्हे मेरा, हर दर्द सुनाई देगा। इन बंद दरवाज़ो की… Read More »अगर देखो कभी गौर से तो तुम्हे मेरा हर दर्द दिखाई देगा… राधा बंगारी जी की कलम से